- Post by दलित आन्दोलन 2017-11-06
देश में लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार ने जब गरीबों, दलितों, किसानों और महिलाओं को केंद्र में रखकर जब अपना काम शुरू किया था, उस वक्त सरकार के विरोधियों ने यह कहने में कोई संकोच नहीं किया था कि आखिर गरीबों, दलितों, किसानों और महिलाओं के लिए क्या कुछ विशेष करके दिखा पायेगी यह सरकार? पर अब जब तीन साल से ज्यादा वक्त बीत चुका, तब देश के दलितों, गरीबों, किसानों और महिलाओं के हित जिस तरह से पूरे होने शुरू चुके है, उसे देखकर सरकार के विरोधी सकते की हालत में है। विरोधियों को समझ नहीं आ रहा कि सरकार की आलोचना कैसे की जाये और यही वजह है कि विरोधी दलों के नेता विरोध के नाम पर छिछोरी राजनीति करते हुए ऐसे आरोप लगा रहे हैं, जिन आरोपों पर जनता ध्यान देने के लिए तैयार नहीं हैं।
देखा जाये तो वर्तमान में भाजपा की केंद्र से लेकर तमाम राज्यों वाली सरकार की राजनीति का मुख्य उद्देश्य देश एवं राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त करना है, न कि जातीय वैमनस्यता में फंसा कर देश और भारतीय समाज को पीछे धकेलना। इसका कारण यह भी है कि अब वह दौर भी नहीं रहा, जहां जातीय भेदभाव के नाम पर देश की राजनीति बढ़ती थी। अब वह समय है, जहां प्रधानमंत्री मोदी अपनी जननीतियों के कारण एक तरह से राष्ट्रनायक बन चुके हैं और सवा सौ करोड़ देशवासी उनके साथ चलने को तैयार हैं। सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही केंद्र से लेकर विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों की राजनीति में दलितों और गरीबों के कल्याण को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा हैं और जमीनी स्तर पर जिस तरह से काम हो रहा है, उसकी वजह से मायावती, मुलायम सिंह, लालू प्रसाद, ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेताओं की जमीन लगातार खिसकती जा रही है।
तीन साल के कार्यकाल के दौरान दलितों, गरीबों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों के लिए जो योजनाएं लायी गई, अगर उन पर गौर किया जाये तो स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री जन धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना, अटल पेंशन योजना, कम खर्च पर दुर्घटना बीमा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा बैंक, भूमि स्वास्थ्य कार्ड योजना, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, मिशन इन्द्रधनुष, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना जैसी एक सौ से अधिक योजनाएं कही न कही प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृस्टि के साथ ही दलितों और गरीबों के बेहतर भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को तो दशार्ती ही है, साथ ही खुलासा भी करती है कि किस तरह से आजादी के 65 साल तक दलितों और गरीबों को सिर्फ आश्वासन ही दिए गए और उनको सिर्फ सत्ता हासिल करने का माध्यम ही समझा गया।
केंद्र से लेकर राज्यों तक की सत्ता संभालने वाली विरोधी दलों की सरकारों ने दलितों और गरीबों के नाम पर नाम पर सिर्फ घोटाले किये और दलितों-गरीबों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया। इसके विपरीत अब तक के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जिस तरह से समाज को जोड़ने की नीति बनाई है, वह गरीबों, दलितों सहित देश के सभी लोगों को भा रही है। सबका साथ-सबका विकास के नारे के साथ एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा वर्तमान में युवाओं को ज्यादा पसंद आयी है और जनता का एक भरोसा सरकार पर कायम हो चुका है।
गौर करने लायक तथ्य यह भी है कि लोकतंत्र में पूरे विकास तंत्र (विकास से अभिप्राय केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक विकास और सोच में परिवर्तन भी शामिल है) पर ध्यान देने की जरुरत होती है और ऐसे विकास तंत्र में नई सामाजिकता, सचेतनता और लोकतंत्र का व्यापक प्रसार भी होना जरुरी है। यही वजह है कि मोदी सरकार के तीन साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान, विरोधी चाहे जितना कुप्रचार क्यों न करे रहे, लेकिन जमीनी सच की तस्वीर अलग है और ये तस्वीर देख कर लगता है कि देश में सालों बाद अब वास्तव में गरीबों और दलितों के लिए कुछ किया जा रहा है।
सालों तक कांग्रेस या कांग्रेस समर्थित सरकारों के राज में भारत की जो तस्वीर थी, वह बदलती नजर आ रही है। जहां पहले भारत को भ्रष्टाचार और गरीबी के लिए जाना जाता था, वहीं नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बनता जा रहा है। हाल ही में हावर्ड विश्वविद्यालय एक चौकाने वाली रिपोर्ट ने सारी दुनिया को सकते में दल दिया है। चीन को पछाड़ कर वैश्विक नेता बन रहा भारत हार्वर्ड वैश्विक आर्थिक विकास की नई धुरी के तौर पर उभर चुका है। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गयी है कि आने वाले कई सालों तक भारत अपनी इस स्थिति को बरकरार भी रखेगा। रिपोर्ट में भारत की तेज विकास दर के लिए कई क्षेत्रों में विविधता और क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल को जिम्मेदार बताया गया है।
देश के साथ ही दलितों और गरीबों के बदल रही तस्वीर के बीच किसानों के बदलते हालात को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। देश की पिछली सरकारें किसानों की बात तो करती थी, लेकिन बातों और वादों के बावजूद देश का किसान, जिसमें दलित और गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा है, उसके कल्याण के वास्तव में कोई प्रयास नहीं किए गए थे। यही वजह रही कि देश की जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी और विकास लगातार कम होता गया और आजादी के बाद से अब तक तीन लाख किसान सरकारी धोखाधड़ी के कारण अपनी जान देने के लिए मजबूर हो गए। कृषि पर केंद्रित दलितों और गरीबों के सम्मान और विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने जो पहल की, वो उनकी उस संवेदनशील सोच को दशार्ती है, जो दलितों, गरीब और किसान के समग्र विकास पर टिकी है। देश में पहली बार जमीन के स्वास्थ्य को जांचने की व्यवस्था मोदी सरकार ने की और इसका मकसद गरीब और दलित किसानों को जमीन की जांच करके, उन्हें ऐसी फसलो के बारे में जानकारी देना है, जो उनकी कृषि भूमि के अनुरूप हो और जिससे पैदावार को बढ़ाया जा सके। हैरत की बात यह भी है कि विज्ञान की दम पर दलितों, गरीबों और किसानों के विकास की बात करने वाली सरकारों ने पहले कभी इस बारे में ध्यान नही दिया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के हितों के लिए जो कदम उठाये है, उनमे मिटटी का उत्पादन बढ़ाने और यूरिआ की कालाबाजारी रोकने के लिए नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन शुरू करना, नई यूरिआ नीति की घोषणा, दैवीय आपदा से फसल बर्बाद होने पर मिलने वाले मुआवजा में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी, नहर, लघु सिचाई और वाटरशेड विकास के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना, राष्ट्रीय गोवंश मिशन शुरू करने के साथ ही कृषि के लिए मिलने वाले उधार की प्रक्रिया को और सरल कर दिया है। कृषि ऋण की माफी भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम कहा जा सकता है। दलितों और गरीब किसानों के लिए गांव में 24 घंटे बिजली देने के लिए भी युद्धस्तर पर जिस तरह से काम किया गया, उसके सुखद परिणाम नजर आने लगे है। कुल मिलकर देखा जाये कि आने वाले सालों में अगर देश में कृषि की हिस्सेदारी बढ़ती है तो इसका लाभ सीधे दलितों और गरीबों को ही मिलेगा क्योंकि कृषि पर जीवन जीने वाले में दलितों और गरीबों की बड़ी सख्या देश में है और जब यह सभी मजबूत होगें तो भारत को मजबूत होने से कोई नही रोक पायेगा। विकास के अजेंडे पर चल रही मोदी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, बिजली, पानी सहित हर मोेर्चे पर अपनी समाज सेवी नीतिओ को लागू करने की दिशा में तेजी से कम कर रही है। स्वच्छ, पारदर्शी और भ्रस्टाचार मुक्त सरकार के साथ ही, व्यवस्था में सालों से लगी जंग को भी साफ करने का काम जारी है। यह सब देख कर देश की जनता, खास कर दलितों और गरीबों को ऐसा लगने लगा है कि अब वास्तव में उनके लिए काम किया जा रहा है और विकास के द्वार अब उनके लिए भी खुल चुके हैं।



